अचार में पानी चला जाए तो क्या करें अगर अचार बनाते समय जार को खोलने पर अंदर पानी दिखाई देने लगे तो देखते ही सबसे पहले तो चिंता ही होने लगती है कि अब क्या होगा। कहीं पूरा अचार खराब तो नहीं हो जाएगा और कई लोग ऐसी स्थिति में आचार को फेंक ही देते हैं। जबकि हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं होता। अचार को खराब होने से बचने के लिए भी आसान तरीके हैं।
देखिए पहले तो यह समझना जरूरी है कि आचार में जो पानी दिख रहा है वह आया कहां से अगर वह फल या सब्जी का प्राकृतिक रस है तो ठीक है लेकिन अगर गलती से फल या सब्जी में नमी छूट गई थी जो बाद में पानी बनकर दिख रही है तो यह गंभीर बात है। लेकिन दोनों ही स्थितियों में समाधान भी अलग-अलग होता है।
सबसे पहले यह पहचानें कि पानी किस प्रकार का है
जैसा कि मैंने कहा कि अचार में पानी दिखाई देने का मतलब हमेशा खराबी नहीं होता। जैसे की नींबू, आम, गाजर और मिर्च जैसे कई पदार्थ नमक डालने के बाद अपना रस छोड़ देते हैं और यह है एक सामान्य प्रक्रिया है तो इसमें कोई डरने वाली बात नहीं है।
लेकिन अगर पानी गीली चम्मच, गीले हाथ या कम सूखे हुए जार या बारिश की नमी की वजह से दिख रहा है तो यह एक समस्या है।
सामान्य पानी की पहचान
- अचार को सूंघने पर खुशबू बिल्कुल सामान्य होगी।
- किसी भी प्रकार की बदबू ना आए।
- अचार की ऊपरी परत पर फफूंदी ना दिखे।
- खाने में स्वाद बिल्कुल सामान्य हो।
- पानी हो तो बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा हो।
खराबी होने के शुरुवाती संकेत
- अचार को सूंघने पर खट्टी या सड़ी हुई गंध आ रही हो।अचार के
- ऊपरी भाग में सफेद हारे या काली रंग की परत बन रही हो।
- अचार के अंदर साफ-साफ झाग दिख रहे हो।
- अचार का अपने आप में जरूरत से ज्यादा नरम हो जाना।
- चिपचिपापन महसूस होना
अगर इनमें से कोई भी संकेत नहीं दिख रहा है तो काफी हद तक अचार को बचाया जा सकता है।
अचार में पानी चला जाए तो तुरंत क्या करें?
जैसा कि मैंने कहा कि अचार में पानी दिखाई देने का मतलब हमेशा खराबी नहीं होता। जैसे की नींबू, आम, गाअगर पानी की मात्रा कम दिख रही है और कोई बदबू, फफूंदी नहीं दिख रही है तो आप इनमें से कुछ उपाय करें।
अचार को धूप दिखाएं
जब हम घर में अचार बनाते हैं तो यह तरीका बहुत काम आता है कि आचार के जार को ग्रुप में कुछ घंटे के लिए रख दें।धूप नमी को कम करने में बहुत मदद करती है।
नमक की जांच करें
कभी-कभी समस्या नमक के काम होने के कारण भी हो सकती है आप चख कर देखें अगर मात्रा कम है तो उसमें और नमक मिलाएं। नमक अचार को खराब होने से बचाता है।
तेल की मात्रा बढ़ाएं
तेल की मात्रा पर्याप्त होने से अचार जल्दी से खराब नहीं होता। अचार हमेशा ऊपरी सतह के अंदर डूबा होना चाहिए।जर और मिर्च जैसे कई पदार्थ नमक डालने के बाद अपना रस छोड़ देते हैं और यह है एक सामान्य प्रक्रिया है तो इसमें कोई डरने वाली बात नहीं है।
लेकिन अगर पानी गीली चम्मच, गीले हाथ या कम सूखे हुए जार या बारिश की नमी की वजह से दिख रहा है तो यह एक समस्या है।
ध्यान दें
लोग आम के अचार को घर पर बहुत ज्यादा बनाते हैं इसमें एक आम समस्या देखने को मिलती है कि आम के कच्चे आम के टुकड़े जिनमें से रस निकलता है और यह सामान्य होता है।अगर मैं अपने अनुभव से बताऊं तो आम के अचार में अगर सही नमक है और सही तेल है तो हल्की नमी होने पर भी कुछ बड़ा नुकसान नहीं होता है।
नींबू के अचार में भी तरल रस होता है जो की बिल्कुल सामान्य बात है इसमें घबराने की कोई बात नहीं है बशर्ते उसमें से बदबू ना रही हो। सब सामान्य हो।
मिर्च और गाजर के अचार में ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है क्योंकि इसमें नमी की वजह से यह आचार बहुत जल्दी खराब होना शुरू हो जाते हैं इसलिए कई बार देखा है कि इन आचारो में फफूंदी या अचार पर सफेद रंग की परत भी जम जाती है इसीलिए इन आचारो का इस्तेमाल करने के लिए थोड़ी सावधानियां बरतनी चाहिए जैसे कि
- सुखी चम्मच का उपयोग करना चाहिए।
- जार को बार-बार नहीं खोलना चाहिए।
- अचार को नमी वाले स्थान पर नहीं रखें।
अचार को कब बचाया जा सकता है
अचार को लगभग लगभग बचाया जा सकता है जब :-
- कहीं भी फफूंदी ना दिख रही हो।सुनने पर बदबू भी ना रही हो
- खाने पर स्वाद में कोई फर्क ना दिखे मतलब सामान्य स्वाद हो।
- पानी की मात्रा बहुत ज्यादा ना दिख रही हो।
अगर इस प्रकार की स्थिति है तो धूप, नमक और तेल के सही संतुलन से हम अचार को बचा सकते हैं।
फर्मेंटेशन क्या है और अचार में कब होती है विस्तार से पढ़े।
कब अचार को फेंक देना चाहिए
कुछ स्थितियां ऐसी बन जाती हैं जिसमें जोखिम लेना बिल्कुल ठीक नहीं होता क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। यदि अचार में :-
- जार के अंदर हरे रंग की फफूंदी दिखाई दे रही हो।
- हरे रंग की फफूंदी बहुत ज्यादा फैल गई हो।
- सड़ी हुई बदबू आ रही हो।
- अचार पूरा चिपचिपा हो गया हो।
- अचार का स्वाद पूरी तरीके से खराब हो गया हो।
ऐसे अचार को बिल्कुल भी इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। ऐसा अचार हमारे पेट में बहुत प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। हमारे स्वास्थ्य को खराब कर सकता है इसलिए ऐसे अचार को फेक ही देना चाहिए।
भविष्य में अचार में पानी जाने से कैसे बचें
अचार को खराब होने से हम शुरू में ही रोक सकते हैं लेकिन उसके लिए हमें समय-समय पर जांच करते रहना होगा।
इन बातों का ध्यान रखें
- जार को इस्तेमाल करने से पहले यह देख ले कि वह पूरी तरीके से सूखा हुआ हो।
- फल और सब्जियों को धोने के बाद अच्छी तरह सुखाय ताकि नमी बिल्कुल भी ना बचे।
- अचार लेते समय हमेशा सुखी चम्मच का इस्तेमाल करें।
- गीले हाथ अचार में बिल्कुल भी ना डालें।
- अचार बनाते समय नमक की मात्रा बिल्कुल सही रखें। नमक अचार को खराब होने से बचाता है।
- तेल वाले अचार में तेल की परत को बनाए रखें।
- बरसात के मौसम में अचार को इस्तेमाल करते समय ज्यादा सावधानी बरतें।
- जार को नमी वाली जगह पर ना रखें।
- कोशिश करें कि एक बड़ा जार रखें जिसमें से छोटे जार में अचार को निकाल कर फिर इस्तेमाल करें ताकि बड़े जार को कम से कम बार खोला जाए।
मेरे अनुभव से अचार खराब होने की सामान्य वजह नमक कम डालना, गीला चम्मच का इस्तेमाल करना या नमी वाली जगह पर अचार को खुला छोड़ देना या अचार में तेल कम डालना। थोड़ी सी भी नमी महीनो के अचार और मेहनत को बर्बाद कर सकती हैं।
अचार बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें विस्तार से पढ़े।
❓अचार और जार से जुड़े सवाल (FAQ)
क्या अचार में पानी आने का मतलब वह खराब हो गया है?
ऐसा जरूरी नहीं है कई बार यह फल और सब्जियों का प्राकृतिक रेसिपी होता है।
क्या धूप दिखाने से अचार बच सकता है?
अगर खराबी शुरुआती अवस्था में हो और फफूंदी भी कहीं भी दिखाई ना दे रही हो तो धूप मदद कर सकती है।
क्या अतिरिक्त नमक डालना चाहिए?
अचार में दोबारा नमक तभी डालना है जब अचार में नमक की मात्रा कम हो अगर बिना जरुरत के नमक डालोगे तो स्वाद बिल्कुल बिगड़ जाएगा।
क्या पानी वाला अचार खाना सुरक्षित है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि जो रस है वह क्या प्राकृतिक है या खराबी का संकेत है अगर गंध , स्वाद या फफूंदी दिख रही है तो ऐसे अचार को नहीं खाना चाहिए।
क्या फ्रिज में रखने से अचार सुरक्षित रहता है?
सिर्फ कुछ प्रकार के आचारो में फ्रिज मदद कर सकता है। पारंपरिक भारतीय अचार सामान्य तापमान पर भी सुरक्षित रह सकते हैं बस नमक, तेल और साफ सफाई का ध्यान रखा जाए तो।
