घर का अचार बाजार वाले अचार से बेहतर क्यों होता है यह सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं है बल्कि भरोसे, सेहत, सफाई और उस पुराने घरेलू स्वाद का भी है जो शायद आज भी लोगों के दिल में बसा हुआ है। आपने भी महसूस किया होगा कि चाहे बाजार में कितने भी महंगे अचार आ जाएँ लेकिन जब घर का बना आम, नींबू या मिर्च का अचार खाने को मिल जाता है तो खाने का मजा अलग ही हो जाता है।
दाल साधारण हो सकती है, सब्जी फीकी हो सकती है लेकिन अगर साथ में घर का अचार हो तो खाना पूरा लगने लगता है।
पुराने ज़माने में भी जब किसी को लम्बी यात्रा करनी होती थी तो रोटी के साथ अचार जरूर बांध लिया करते थे और आज भी लोग जब विदेश जाते है या घुमने जाते है तो अक्सर रोटी के साथ अचार को जरूर ले कर जाते है।
बाजार में अचार के छोटे बड़े पैक आते है लेकिन आज भी जो स्वाद घर के अचार का है वो मज़ा बाजार के अचार में नहीं हो सकता इसलिए आज भी बहुत लोग बाजार के बजाय घर का बना अचार ज्यादा पसंद करते हैं। पहले लगभग हर घर में गर्मियों की शुरुआत होते ही दादी नानी मम्मी अचार डालने की तैयारी शुरू कर दिया करती थी। छत पर सूखते आम, मसालों की खुशबू, धूप में रखी बरनियाँ । ये सब सिर्फ खाना नहीं था बल्कि घर की परंपरा जैसा था जिसे लगभग हर साल दोहराया जाता था।
लेकिन अब बाजार में हर तरह के अचार आसानी से मिलने लगे हैं बहुत से ऐसे लोग भी है जो अभी नए है गाँव से दूर है इसलिए उन्होंने ये सब नहीं देखा इसलिए बहुत लोग सोचते हैं कि आखिर घर का अचार इतना खास क्यों माना जाता है?
तो आगे बात करते है इसी बारे में।
1. घर के अचार में मिलावट और केमिकल का डर बहुत कम होता है
सबसे बड़ा फर्क मिलावट और केमिकल का ही होता है जब आप खुद घर में अचार बनाते हैं तो आपको पहले से ही पता होता है कि अंदर क्या डाला गया है और कितना डाला गया है जैसे :
- कौन सा तेल इस्तेमाल किया।
- कौन सा नमक डाला।
- मसाले ताजे डाले हैं या पुराने।
- सब्जी या फलो की क्वालिटी ।
जैसे सब कुछ सामने ही होता है।
लेकिन बाजार वाले लोग अचार में कई बार स्वाद बढ़ाने के लिए या अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग preservatives और chemicals इस्तेमाल कर लेते हैं क्युकि लोग ज्यादा पैसा कमाना चाहते है अचार को जल्दी बनाना चाहते है।
अब हर कंपनी खराब हो ऐसा जरूरी नहीं है लेकिन फिर भी घर जैसा भरोसा मिलना मुश्किल है। आज भी जब कही से भी अचार खरीदते है तो उसमे पहली बात नमक की ज्यादा मात्रा होती है क्युकि अचार को जल्द बाजी में बनाया गया होता है लगभग लोग आजकल यही कर रहे है।
जबकि घर में लोग वही चीज इस्तेमाल करते हैं जो खुद अपने परिवार को खिलानी होती है और यही सबसे बड़ा भरोसा होता है। घर के अचार में भरोसे की बात होती है।
2. घर के अचार का स्वाद ज्यादा असली और ताजा लगता है
आपने देखा होगा कि कई बाजार वाले अचार का स्वाद लगभग एक जैसा लगता है।
क्योंकि वहां मशीनों से एक सटीक स्वाद को तैयार किया जाता है ताकि हर अचार का स्वाद एक जैसा रहे।
लेकिन घर के अचार में बिलकुल ऐसा नहीं होता क्योकि हर घर का स्वाद अलग अलग होता है :-
- कहीं ज्यादा खट्टा
- कहीं ज्यादा तीखा
- कहीं सौंफ की खुशबू ज्यादा
- कहीं मेथी का स्वाद अलग
और यही चीज घर के अचार को बहुत खास बनाती है क्युकि घर का अचार रेसिपी से ज्यादा अनुभव से बनता है जो पुराने समय से चलता आ रहा है। अगर आपने अपने दादी या माँ को कई बार बिना नापे ही मसाले डालते देखा होगा लेकिन स्वाद इतना बढ़िया आता है कि लोग उंगलियाँ चाटते रह जाते हैं। ये स्वाद इतना अच्छा होता है कि फिर बाज़ार का अचार बिलकुल पसंद नहीं आता।
3. घर में अचार छोटे बैच में बनता है इसलिए गुणवत्ता अच्छी रहती है
बाजार में बिकने वाला अचार फैक्ट्री में हजारों किलो एक साथ तैयार किया जाता है।
लेकिन घर में ऐसा बिलकुल नहीं होता। चुन चुन कर मसाले डाले जाते है और अचार स्वादिस्ट अचार बनाया जाता है और घर में लोग सीमित मात्रा में अचार बनाते हैं इसलिए भी हर चीज पर ध्यान दिया जाता है।
- आम ठीक से सूखे हैं या नहीं
- नमक सही है या नहीं
- तेल पूरा डूब रहा है या नहीं
हर छोटी चीज को ध्यान से देखा जाता है।
यही वजह है कि घर पर बनाया गया अचार में अपनापन और जुडाव महसूस होता है।
4. घर का अचार ज्यादा साफ-सुथरा हो सकता है
बहुत लोग सोचते हैं कि फैक्ट्री मतलब ज्यादा साफ-सफाई लेकिन हर जगह साफ सफाई नहीं होती फक्ट्री में ज्यादा अचार बनाने का जोर होता है। लेकिन असली बात ये है कि घर में अगर सही तरीके से अचार बनाया जाए तो साफ सफाई को बहुत अच्छा रखा जा सकता है जैसे :-
- साफ सूती कपड़ा इस्तेमाल करना
- धूप में अच्छे से सुखाना
- सूखे चम्मच का इस्तेमाल करना
- साफ कांच की बरनी रखना
इन छोटी-छोटी चीजों का अचार के स्वाद और उम्र पर बहुत बड़ा असर पड़ता है और घर में अचार बनाने वाला हर चीज को देख रहा होता है इसलिए लापरवाही कम होती है।
5. घर के अचार में तेल और नमक अपनी पसंद के हिसाब से रख सकते हैं
ये बहुत बड़ा फायदा है कि अगर घर में किसी को ज्यादा नमक पसंद नहीं है तो कम डाल सकते हैं। अगर ज्यादा तेल पसंद नहीं तो तेल थोड़ा कम रख सकते हैं। अगर तीखा पसंद है तो मिर्च बढ़ा सकते हैं।
मतलब पूरा कण्ट्रोल आपके हाथ में रहता है।
बाजार में ऐसा कभी संभव नहीं हो सकता क्युकि वहाँ सबके लिए एक जैसा अचार बनाया जाता है। वैसे मैंने बाज़ार के अचार को चख कर देखा है ज्यादातर बाजारू अचार में नमक ज्यादा होता है और तेल कम होता है और कभी कभी तो तेल की जगह पाम तेल का भी लोग उसे करते है जो स्वाद को बदल देते है।
6. घर के अचार में धूप का असली स्वाद आता है
धूप अचार का सबसे जरूरी हिस्सा होती है। पुराने समय में दादी-नानी अचार को रोज धूप दिखाती थी और बीच-बीच में चलाती भी थी। जिससे अचार पूरी तरह से सूख जाता था और अचार बनाने के लिए परफेक्ट बन जाता था।
धूप क्या करती है?
- बची हुई नमी को खत्म करती है
- फंगस का खतरा कम करती है
- मसालों का स्वाद अंदर तक पहुंचाती है
- अचार को धीरे-धीरे mature करती है
इसीलिए 2 दिन पुराना अचार और 20 दिन पुराना अचार एक जैसा नहीं लगता। समय के साथ अचार का स्वाद बदलता रहता है नानी दादी पुराने अचार को ज्यादा स्वादिस्ट बताते थे वैसे पुराना अचार बहुत स्वादिस्ट होता है वैसा स्वाद बनने के लिए समय लगता है। धूप में रखा अचार धीरे-धीरे अपना असली स्वाद पकड़ता है।
बाजारू अचार को फक्ट्री में तैयार किया जाता है मशीनों में सुखाया जाता है इसलिए बनाने के तरीके में बदलाव के कारण फिर स्वाद में भी फर्क दिखने लगता है।
7. घर का अचार आपसी जुड़ाव भी रखता है
ये बात शायद सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर का अचार सिर्फ अचार नहीं होता उसके साथ घर की यादे भी जुड़ी होती हैं।
हॉस्टल या घर से में रहने वाले बच्चों और लोगो से पूछोगे तो वो बताएँगे कि जब घर से अचार आता है तो खाने का मजा बदल जाता है। कई लोग तो सिर्फ अचार के साथ ही 2-3 रोटी खा लेते हैं और हाँ घर के अचार को उतना ही लेते है जितना जरूरत है मतलब ख़राब नहीं करते।
और सच कहूँ तो…
माँ के हाथ के अचार का स्वाद कोई कंपनी कॉपी नहीं कर सकती। बाजारू अचार में एक जैसा स्वाद रहता है लेकिन घर के अचार में जितना पुराना अचार होगा उतना ही स्वाद उसमे ज्यादा बढ़ जाता है।
8. बाजार वाले अचार की सबसे बड़ी समस्या - लंबे समय तक स्टोर करना
दुकानों में अचार महीनों तक रखा रह सकता है इसीलिए उसे ऐसा बनाना पड़ता है कि लम्बे समय तक अचार ख़राब ही ना हो इसलिए बहुत से तरीके बाज़ार वाले अपनाते है जैसे :
- कई बार ज्यादा सिरका डाला जाता है
- कई बार preservatives डाले जाते है और कई बार बहुत ज्यादा भी डाले जाते है।
- कई बार artificial acidity regulators और ज्यादातर नमक की ज्यादा मात्रा इसलिए बाज़ार के अचार ज्यादा नमकीन हो सकते है।
ये सब इसलिए किता जाता है ताकि अचार जल्दी खराब ना हो।
लेकिन इससे कई बार स्वाद प्राकृतिक नहीं लगता इसलिए पसंद भी नहीं आता इसलिए घर का अचार बाज़ार के अचार से ज्यादा सुघंधित, स्वादिष्ट लगता है।
9. घर के अचार में मौसम और परंपरा दोनों जुड़ी होती हैं
भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग अलग तरह के अचार लोग अपने घरो में बनाते है। जैसे अलग अलग राज्यों में अलग अलग वैरायटी के आम और अलग अलग सब्जियां उगाई जाती है जैसे राजस्थान में सिंगरी का अचार बहुत विख्यात है।
- राजस्थान में अलग स्वाद
- पंजाब में अलग
- गुजरात में अलग
- दक्षिण भारत में अलग
और मजेदार बात ये है कि हर परिवार का अपना पुराना तरीका भी अलग होता है जो उन्हें उनके दादी नानी या माँ ने सिखाया होता है।
- कहीं राई ज्यादा
- कहीं मेथी ज्यादा
- कहीं गुड़ भी डाला जाता है
यानी अचार सिर्फ रेसिपी नहीं बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही परंपरा भी है।
10. घर का अचार बिल्कुल सही नहीं होता - लेकिन यही उसकी खूबसूरती है
- कभी नमक थोड़ा ज्यादा हो जाता है।
- कभी तेल ऊपर आ जाता है।
- कभी-कभी आम थोड़े नरम हो जाते हैं।
लेकिन फिर भी वो अच्छा लगता है। यही इसे ख़ास बना देता है क्योंकि उसमें मशीन वाला स्वाद नहीं होता क्युकि :-
- उसमें इंसान का हाथ होता है।
- मेहनत होती है।
- घर की खुशबू होती है।
और शायद यही वजह है कि लोग आज भी पूछते हैं “ये अचार घर का बना है क्या?”
किसी भी भारतीय को अगर आप्शन दिया जाए की बाज़ार का अचार या घर का अचार तो शायद ही कोई बाज़ार के अचार को लेगा सब लोग घर के अचार को ही खाना पसंद करेंगे।
अचार बनाने के लिए कौन सा तेल सबसे अच्छा माना जाता है?
❓अचार और जार से जुड़े सवाल (FAQ)
क्या घर का अचार बाजार के अचार से ज्यादा सुरक्षित होता है?
अगर अचार सही तरीके से बनाया गया हो, साफ-सफाई का ध्यान रखा गया हो और सही नमक व तेल इस्तेमाल किया गया हो तो घर का अचार काफी हद तक सुरक्षित मान सकते है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि आपको पता होता है कि उसमें कौन-कौन सी चीजें डाली गई हैं।
अचार बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जानने के लिए ब्लॉग लिंक पर क्लिक करे।
घर का अचार कितने समय तक खराब हुए बिना चल सकता है?
यह अचार के प्रकार और बनाने के तरीके पर निर्भर करता है। आम, नींबू और मिर्च के कई अचार सही देखभाल के साथ 1 से 3 साल या उससे भी अधिक समय तक चल सकते हैं। अभी मै खाने के साथ 6 साल पुराना अचार खा रहा हूँ जो बहुत स्वादिस्ट हो गया है।
बाजार वाले अचार में प्रिजर्वेटिव (Preservatives) क्यों डाले जाते हैं?
बाजार में अचार को लंबे समय तक स्टोर करना पड़ता है और अलग-अलग जगह भेजना पड़ता है। इसी कारण कई कंपनियां अचार की उम्र को बढ़ाने के लिए preservatives का उपयोग करती हैं।
घर के अचार का स्वाद बाजार के अचार से अलग क्यों होता है?
हर घर में मसालों, तेल और नमक की मात्रा अलग होती है। साथ ही अचार बनाने का तरीका भी अलग होता है। यही कारण है कि घर के अचार का स्वाद अधिक प्राकृतिक और ख़ास होता है।जबकि फक्ट्री में ऐसा नहीं होता।
क्या घर का अचार ज्यादा हेल्दी होता है?
कई मामलों में हाँ। घर पर अचार बनाते समय आप नमक, तेल और मसालों की मात्रा अपनी जरूरत के हिसाब से रख सकते हैं। इसी वजह से ज्यादातर लोग घर का अचार ज्यादा पसंद करते हैं।
अचार बनाने के लिए कौन सा तेल सबसे अच्छा माना जाता है?
उत्तर भारत में सरसों का तेल सबसे लोकप्रिय माना जाता है क्योंकि यह स्वाद बढ़ाता है और अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के गुण होते है। और जैसे दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में तिल के तेल का भी उपयोग किया जाता है।
क्या घर का अचार बिना प्रिजर्वेटिव के लंबे समय तक चल सकता है?
हाँ। सही मात्रा में नमक, तेल और धूप मिलने पर अचार प्राकृतिक रूप से लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है। पुराने समय में अधिकांश अचार बिना किसी केमिकल प्रिजर्वेटिव के ही बनाए जाते थे। अभी भी मैं 6 साल पुराना अचार खा रहा हूँ जो बहुत स्वादिस्ट है।
अचार में कितना नमक और कोनसा नमक डालना चाहिए ? विस्तार से जानने के लिए क्लिक कर के आप ब्लॉग पढ़ सकते है।
घर का अचार जल्दी खराब क्यों हो जाता है?
अधिकतर मामलों में नमी इसकी सबसे बड़ी वजह होती है। गीले फल-सब्जियाँ, गीला चम्मच, कम नमक या कम तेल अचार को जल्दी खराब कर सकते हैं।
अचार में फफूंदी क्यों लगती है 9 बड़े कारण, पहचान और कैसे रोके? पढने के लिए लिंक पर क्लिक करे।
क्या बाजार का हर अचार खराब होता है?
नहीं। कई अच्छी कंपनियाँ गुणवत्ता वाले अचार बनाती हैं। लेकिन घर के अचार में सामग्री और बनाने की प्रक्रिया पर आपका पूरा नियंत्रण होता है, इसलिए लोग उसे अधिक भरोसेमंद मानते हैं और घर के अचार के लिए ज्यादा पैसे देने के लिए भी तैयार हो जाते है।
लोग आज भी घर का अचार इतना पसंद क्यों करते हैं?
घर के अचार में सिर्फ स्वाद नहीं होता, उससे यादें और भावनाएँ भी जुड़ी होती हैं। दादी-नानी की रेसिपी, घर की खुशबू और पारंपरिक स्वाद ऐसी चीजें हैं जिन्हें बाजार पूरी तरह से दोहरा नहीं सकता।
