अचार कभी खराब न हो, स्वाद भी बढ़े और सालों तक सुरक्षित रहे।
अचार बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें यह हर अचार बनाने वाले के लिए सबसे जरूरी सवाल है क्यूँकि हर घर में अचार की जगह वो है जो सब्जी न भी हो तो भी खाने को लाजवाब बना देता है। खाना सुबह का हो या शाम का स्वादिष्ट और चटपटा बना देता है। लोग अचार की जरूरत को समझते है। अगर थाली में न दिखाई दे तो खाना कुछ काम सा लगता है। बचपन से हम सब देखते आ रहे है कि दादी जी या माँ जी खुद अचार डालती थी और उनकी कुछ पड़ोस की महिलाएँ भी मदद करने आ जाती थी। यह अचार के स्वाद का सिलसिला पीढ़ियों दर पीढ़ियों से चला आ रहा है
हर घर के अचार का स्वाद अलग-अलग होता है :-
- किसी का ज़्यादा खट्टा,
- तो कहीं तीखा,
- तो कहीं हल्का मीठा।
और इसी वजह से लोग अक्सर कहते हैं कि हमारे घर जैसा अचार बाहर कहीं नहीं मिलता।
लेकिन आज की सच्चाई ये भी है कि जब लोग अचार बनाते है तो बहुत सी गलतियाँ कर देते है और फिर दुःख होता है क्यूँकि :-
- अचार बनाए हुए कुछ ही महीने होते है कि अचार ख़राब होने लगता है।
- ऊपर सफेद-सफेद या हरी-हरी फफूंदी या फंगस नजर आने लगती है।
- खाने के साथ खाने पर स्वाद थोड़ा कड़वा या अजीब सा हो जाता है।
- कुछ दिनों बाद अचार कर रंग बदलने लगता है।
- कभी कभी बहुत ज्यादा खट्टा हो जाता है।
- कभी तेल ऊपर तैरने लगता है।
और तब एक बात जरूर मन में आ ही जाती है कि :-
पहले हमारी दादी-नानी का अचार तो 5-10 साल चलता था। कोई परेशानी नहीं आती थी और आज हमारा 5–6 महीने में ही क्यों खराब हो जाता है?
1. अचार के लिए सही फल या सब्ज़ी को चुनना सबसे पहला कदम।
फल या सब्ज़ी कैसी होनी चाहिए? पूरी तरह ताज़ी
- पूरी तरह ताज़ी
तोड़ने के 1 या 2 दिन में ही अचार बना लेना चाहिए क्यूँकि फल-सब्जी पुराने होने पर नमी और बैक्टीरिया बढ़ जाते है।
नोट : ताजे फल-सब्जियाँ मतलब ख़राब होने का डर कम।
- बिना दाग-धब्बे वाली
काले, भूरे या सड़े हुए निशान, कीड़े के छोटे छेद, नरम या चिपचिपे हिस्से देख कर पता लग जाता है कि फल या सब्जी में अंदर से सड़न शुरू हो चुकी है।
- ज़्यादा पकी हुई नहीं
ज़्यादा पके हुए फल/सब्ज़ी में पानी की मात्रा ज्यादा होती है और अंदर का गूदा भी ढीला होता है
नोट : यही पानी की वजह से अचार में फफूँदी, झाग और बदबू बनती है।
- अंदर से नरम या पानीदार नहीं
कई बार बाहर से देखने पर सब ठीक दिखता है लेकिन अंदर से बीज के पास से नरम होता है और काटते ही पानी सा निकलता है ऐसे टुकड़े अचार के लिए सबसे खतरनाक होते हैं।
सबसे आम गलती:
आचार बनाते समय आप सोचते है कि थोड़ा खराब हिस्सा काट देंगे और यही छोटा सा खराब हिस्सा धीरे-धीरे पूरे अचार को खराब कर देता है। यह गलती लगभग घरों में होती है।
बस ये याद रखें :- “जो चीज़ आप खुद खाने में हिचकिचाए, उसे अचार में कभी न डालें।”
2. धोने के बाद अच्छी तरह सुखाना ( सबसे ज़रूरी )
अचार बनाने में सबसे बड़ी गलती नमी को नज़रअंदाज़ करना है।
अचार का सबसे बड़ा दुश्मन = नमी
नमी अचार को क्यों खराब करती है?
- अचार में नमी हो तो फंगस (फफूँद) तेजी से बढ़ती है।
- नमी में बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिलता है
- तेल अचार पर ठीक से परत नहीं बना पाता जिससे नमी अचार तक पहुंच जाती है
सही तरीका क्या है ?
फल सब्जियों को धोने के तुरंत बाद इस्तेमाल न करें। हो सकता है दिखने में फल सब्जियां सूखी दिखाई दे लेकिन छोटी छोटी दरारों में और अंदुरुनी हिस्सों में पानी छिपा होता है।
- साफ सूती कपड़े पर फैलाएँ :-
- फल सब्जियों के लिए मोटा, साफ और सूखा सूती कपड़ा लें क्योकि सूती कपडा पानी को अपने अंदर जल्दी सोख लेता है जिससे नमी साफ़ हो जाती है।
- फल/सब्ज़ी को एक-दूसरे से अलग या दूर दूर फैलाएँ मतलब ढेर बना कर ना रखे। इससे हवा हर तरफ से लगेगी।
- 2-6 घंटे तेज धूप में सुखाएँ :-
तेज और सीधी धूप सबसे बेहतर है जो नमी को अच्छे से सूखा देगी। साथ में बीच बीच फलो या सब्जियों को पलट भी दे और जब तक सतह बिलकुल सुखी ना हो जाए, हाथ लगाने पर थोड़ी ठंडक और चिपचिपापन ना लगे तब समझे कि नमी ख़तम हो चुकी है।
जानी पहचानी गलती जो लोग करते है।
थोड़ी नमी तो चलेगी” ऐसा सोचना अचार को खराब कर देता है। होता क्या है ना कि जब हल्की नमी मसाले या फलो या सब्जियों के साथ डब्बे में बंद हो जाती है तो अंदर ही अंदर फंगस पैदा होने लगती है और 5 – 10 दिनों में अचार के ऊपर सफेद परत या बदबू आने लगती है और फिर अचार को बचाना मुश्किल हो जाता है।
3. नमक की मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता मायने रखती है।
नमक सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं डाला जाता, बल्कि यह अचार को महीनों तक सुरक्षित रखने का काम करता है। अगर नमक की गुणवत्ता गलत हो जाए या मात्रा गलत हो जाए तो अचार जल्दी ख़राब हो जाएगा।
अचार के लिए सबसे बेहतर नमक कौनसा है?
- सेंधा नमक :- अचार के लिए सबसे अच्छा और सुरक्षित और पुराने समय से दादी, माँ इस्तेमाल करती आ रही है। क्यूँकि ये बिलकुल शुद्ध होता है और इसमें कोई केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता इसलिए अचार का रंग और स्वाद को बदलता नहीं है।
- बिना आयोडीन वाला नमक :- देखिये बिना आयोडीन वाला नमक कभी कभी अचार का रंग बदल देता है और कभी कभी हल्का सा कड़वापन भी आ सकता है और अचार के पानी को धुंधला भी कर सकता है। इसलिए हमें हमेशा बिना आयोडीन वाला नमक ही अचार के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
अचार में नमक इतना जरूरी क्यों है?
- अतिरिक्त नमी को बाहर निकालता है :- नमक फल या सब्ज़ी के अंदर से अतिरिक्त पानी खींच लेता है और कम पानी का मतलब कम सड़न।
- फंगस और बैक्टीरिया को रोकता है :- नमक नुक्सान करने वाले जीवाणुओं को पैदा नहीं होने देता इसलिए नमक को प्राकृतिक संरक्षक भी कहा जाता है।
- अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है :- अगर नमक को सही मात्रा में डाले तो अचार
महीनों की बजाए सालों तक भी आराम से सुरक्षित रह सकता है।
नमक कम या ज्यादा डालने की गलती
- नमक को कम डालने की गलती :- अगर नमक को कम डाला तो सब्ज़ी का पानी अगर थोड़ा भी अंदर रहा मतलब नमी रही तो ( वैसे नामात्र नमी रह ही जाती है )अचार में झाग बन सकते है फफूंदी भी लग सकती है। कम नमक मतलब = जल्दी अचार ख़राब।
- ज्यादा नमक डालने की गलती :- अगर नमक बहुत ज्यादा डाल दिया तो अचार बहुत खारा हो जाएगा और असली अचार का स्वाद दब जाएगा साथ ही खाने में मज़ा नहीं आएगा। ज्यादा नमक मतलब = स्वाद ख़राब।
अचार में नमक अचार की लम्बी उम्र और स्वाद के हिसाब से डाला जाता है ज्यादा कम हुआ तो स्वाद तो बिगड़ेगा ही साथ में अचार कुछ दिनों में ही ख़राब हो जाएगा।
4. अचार के लिए मसालों को भूनने और पीसने का तरीका
अचार का जो असली स्वाद होता है वो सिर्फ फल या सब्ज़ी से नहीं आता बल्कि मसालों की खुशबू और सही मात्रा में डालने से आता है।
लेकिन ज्यादातर लोग मसालो को गलत तरीके से भुनने की बड़ी गलती ज्यादातर कर देते हैं और एक बात और कि अचार में मसाला अगर जरा सा भी जल गया तो पूरा अचार कड़वा हो सकता है।
सही तरीका
मसालों को हमेशा धीमी आंच पर भूनें :-
अचार में इस्तेमाल होने वाले नाम जैसे
- राई
- मेथी
- सौंफ
- जीरा
- कलौंजी
इनमें प्राकृतिक तेल पहले से ही होता हैं इन्हे अगर धीमे आग पर भूनेंगे तब इनकी असली वाली खूशबू का तेल बाहर आता है और बहुत अच्छी खुशबू भी आती है और स्वाद और गहरा हो जाता है।
मसाले कुरकुरे और खुसबूदार बनते है अगर तेज आग पर मसाले को भूनोगे तो मसाला तो भुना हुआ दिखाई देगा लेकिन अंदर से कच्चा या जला हुआ हो सकता है।
- रंग बदलते ही गैस बंद कर दें :- मसालों को ज़्यादा देर तक भूनना कोई ज़रूरी नहीं है जैसे ही हल्की सी खुशबू आने लगे और रंग थोड़ा सा गहरा हो जाए तो गैस को तुरंत बंद कर दे।
ध्यान रहे कि गैस बंद करने के बाद भी तवे के गर्मी से मसाले थोड़ी देर तक पकते रहते है। - मसालों को पूरी तरह ठंडा होने दे फिर पीसे :- गरम मसाले तुरंत न पीसे अगर पीसेंगे तो नमी बनी रह सकती है या पाउडर चिपचिपा हो सकता है और खुशबू भी कम हो सकती है।
मसलो को पूरी तरह से ठंडा होने दे फिर फिर दरदरा या बारीक पीसें अचार के हिसाब से।
आम गलती
- कई लोग जल्दी जल्दी के चक्कर में मसाले तेज आंच पर भून लेते हैं और फिर इसके नुक्सान होते है जैसे मसलो का जल जाना, स्वाद का बिगड़ जाना, अचार से हल्की सी जलने के गंध आना इस से पूरा अचार ख़राब हो सकता है। जले हुए मसाले कभी अचार में इस्तेमाल नहीं करने चाहिए।
मसाला जितना धीरे-धीरे भुनेगा उतना ही खुशबूदार और उतना ही स्वाद में अच्छा बनेगा।
5. तेल - अचार की सुरक्षा
अचार में तेल एक सुरक्षा परत की तरह करता है आप ऐसे समझे की जैसे नमक अगर अचार की नीव है तो तेल अचार की दीवार है जो अचार की सुरक्षा करती है।
अगर तेल की सही मात्रा इस्तेमाल की जाए तो अचार की उम्र महीनो से लेकर सालो तक बढ़ सकती है।
अचार के लिए सबसे बेहतरीन तेल कौनसा है?
- सरसों का तेल (सबसे सुरक्षित है और असरदार भी )
- भारत में लोग सरसो के तेल को सबसे अच्छा मानते है इसके पीछे कारण भी है।
- इसमें प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं।
- तेज खुशबू इसमें आती है जो अचार को एक खास स्वाद देती है।
- लंबे समय तक खराब होने से बचाता है सरसो का तेल।
इसलिए पुराने ज़माने से दादी माँ आम ,गाजर , मिर्च , अदि के अचार में सरसो के तेल का ही इस्तेमाल करते आई है। सरसो के तेल में अचार लम्बे समय तक टिकता है।
- तिल का तेल (कुछ विशेष अचारों के लिए)
दक्षिण भारत में अचारों में अक्सर तिल का तेल इस्तेमाल किया जाता है क्यूँकि स्वाद में हल्का और संतुलित होता है और कुछ अचारो में ये अच्छा काम करता है।
लेकिन ज्यादातर उत्तर भारतीय अचार में सरसो का तेल को ही ज्यादार बेहतर मानते है। क्यूँकि उनकी दादी माँ सरसो का तेल इस्तेमाल करती आई है।
तेल का सही इस्तेमाल कैसे करें?
- तेल को धुआँ उठने तक गर्म करें :-
तेल को कढ़ाई में डालकर तब तक गर्म करते रहे जब तक कि हल्का हल्का धुआँ न उठने लग जाए। इससे होता क्या है ना कि :-
- तेल में आने वाली कच्ची गंध खत्म हो जाती है।
- उसमें मौजूद नमी भी ख़त्म हो जाती है।
- हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं
- पूरी तरह ठंडा करे फिर अचार में डालें :-
देखिये अगर हम सही तरीके का इस्तेमाल करेंगे तो अचार भी अच्छा बनेगा लेकिन अगर गरम तेल को सीधा अचार में डाल देंगे तो क्या क्या होगा जैसे :-
- मसाले जल सकते हैं
- फल/सब्ज़ी नरम हो सकती है
- स्वाद बिगड़ सकता है
इसलिए तेल को पहले पूरी तरह से ठंडा होने दें फिर उसके बाद अचार में डाले।
तेल का असली काम क्या है?
देखिये जब तेल को अचार में अच्छी तरह से मिला कर जार को ऊपर तक भर दिया जाता है तो तेल क्या करता है:-
- हवा और अचार के जुड़ाव को अलग करता है मतलब आपस में मिलने नहीं देता।
- नमी को बंद कर देता है जिससे फंगस के भड़ने का खतरा नहीं रहता और अचार सुरक्षित रहता है।
नोट : तेल की परत अचार को बाहरी संक्रमण से बचाती है।
- आम गलती :-
अचार में गरम किया हुआ कच्चा तेल का इस्तेमाल करना जिसकी वजह से उसमे नमी रह सकती है और कच्ची गंध अचार के स्वाद को बिगाड़ सकती है साथ में फंगस का भी खतरा हो सकता है।
6. सही बर्तन को चुनना
अचार बनाते समय आप नमक, मसाले और तेल पर तो ध्यान देते ही हैं साथ में बर्तन का भी ध्यान रखना चाहिए क्यूँकि बर्तन भी अचार की उम्र को लम्बा करते है अगर बर्तन गलत चुना तो अचार की उम्र कम हो सकती है या अचार ख़राब भी हो सकता है।
अचार रखने के लिए सबसे अच्छे बर्तन
- कांच का जार :-
अचार के लिए सबसे सुरक्षित तो है ही और लोग इसे पसंद भी करते है और पुराने समय से लोग इस्तेमाल भी करते आ रहे है क्यूँकि :-
- कांच किसी भी मसाले या तेल से रियेक्ट नहीं करता।
- स्वाद के साथ रंग भी बिल्कुल सुरक्षित रहते हैं।
- साफ-सफाई करना भी बहुत आसान होता है।
- धूप में रखने के लिए भी सबसे अच्छा है।
- चीनी मिट्टी का बर्तन
पुराने ज़माने से अचार ज्यादातर चीनी मिट्टी के मटकों में रखे जाते रहे है लोग इसे पसंद करते है।
- तापमान को संतुलित बनाए रखता है।
- अचार के साथ किसी भी प्रकार का रिएक्शन नहीं करता।
- अचार को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।
लेकिन ध्यान रखें: बर्तन अंदर से चिकना होना चाहिए और बिना दरार वाला होना चाहिए।
- फूड ग्रेड प्लास्टिक
अगर अच्छी क्वालिटी फूड ग्रेड प्लास्टिक कंटेनर हो तो हे इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन अगर सस्ता या घटिया प्लास्टिक का इस्तेमाल बिलकुल भी न करे। इसके कई नुक्सान हो सकते है इसमें अचार तो डाल लेंगे आप लेकिन ये कांच जितना सुरक्षित नहीं है। WHO ( World Health Organization ) भी साफ सफाई को बहुत जरूरी मानता है।
- किन बर्तनों से बचना चाहिए?
लोहे का बर्तन
अचार में नमक, मसाले और खटास होती है इसलिए लोहे के साथ रिएक्शन कर सकते है जिससे अचार काला पड़ सकता है और स्वाद भी बिगड़ सकता है और आयरन जैसी गंध आ सकती है।
एल्युमिनियम के बर्तन
एल्युमिनियम खट्टी चीज़ो के साथ रिएक्शन करता है इसलिए जैसे नींबू, आम, सिरका या और भी खट्टी चीज़े अचार में डालती है जिससे रिएक्शन होता है।
- अचार का स्वाद बदल सकता है
- स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा जब रिएक्शन होगा तो।
- अचार जल्दी ख़राब हो जाएगा रिएक्शन होने के कारण।
इसलिए एल्युमिनियम के बर्तन कभी अचार के लिए इस्तेमाल ना करे। बर्तन हमेशा ऐसा चुने जिसमे किसी भी तरह का रिएक्शन या रासायनिक प्रतिक्रिया ना हो।
ध्यान देने की बात
बर्तन चाहे कांच का हो या चीनी मिट्टी का हो उसे इस्तेमाल से पहले अच्छे से धो कर साफ कर ले और फिर पूरी तरह से सूखा ले। ध्यान रखे की अंदर बिलकुल भी नमी ना हो क्यूंकि नमी वाला बर्तन अचार के लिए खतरा ही है।
7. अचार मिलाते समय हाथ और चम्मच की सफ़ाई
अचार को बनाते समय या जार से अचार को बार बार निकालते समय लोग सोचते है “थोड़ी सी नमी से क्या ही फर्क पड़ेगा ?” लेकिन असली दुश्मन बाहर की गन्दगी ही नहीं होती, नमी भी होती है।
पूरी सफ़ाई बहुत जरूरी है क्यूँकि अचार में नमक, तेल और मसाले भी होते है ये सब मिल कर अचार को सुरक्षित रखते है। नमी से अचार ख़राब होने की समस्या आती है। कभी कभी ऊपर सफेद सफेद परत भी जम जाती है।
सही तरीका क्या है?
- हाथ को अच्छे धोए फिर अच्छे से सुखाए
अगर आप हाथ से अचार को मिला रहे हैं तो:-
- पहले हाथ को साबुन से अच्छे से धो लें।
- अच्छी तरह पोंछकर हाथो को पूरी तरह सुखा लें
- हाथ में पसीना भी नहीं होना चाहिए जोकि अचार के लिए खतरनाक है।.
- चम्मच को धो कर अच्छे से सुखाए फिर इस्तेमाल करे
चम्मच को धोने के बाद हवा में सुखाए फिर साफ कपडे से पोछे, नमी बिलकुल नहीं रहनी चाहिए और इस बात का भी ध्यान रखे कि जितनी बार चम्मच का इस्तेमाल अचार निकलने के लिए करे उतनी बार चम्मच को पहले चेक करे की वो साफ और सूखी है फिर इस्तेमाल करे।
8. धूप दिखाना ( पारंपरिक वैज्ञानिक तरीका )
हम सबके घरों में दादी-नानी पहले अचार को धूप में रखा करती थी और उन्होंने भी अपनी दादी-नानी से ये परम्परा सीखी है लेकिन ये बिलकुल वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
धूप अचार को सिर्फ सुखाती ही नहीं है,उसे सुरक्षित और स्वादिष्ट बनाने में भी सहायता करती है।
धूप क्यों ज़रूरी है?
- बची हुई नमी को ख़त्म करती है
जब आप सब्जी या फल सुखाते हो तो भी हल्की नमी कभी कभी रह जाती है उसे धीरे धीरे सूखा देती है और फंगस लगने के खतरे को कम करती है साथ ही अचार की उम्र को बढाती है।
- फर्मेन्टेशन को संतुलित करती है
अचार में नमक, मसाले और प्राकृतिक एंजाइम मिलकर हल्की फर्मेन्टेशन की प्रक्रिया को शुरू करते हैं अगर धूप ना मिले तो प्रक्रिया असंतुलित हो सकती है धूप हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने नहीं देती।
- स्वाद धीरे-धीरे गहराता है
मसालों का तेल फल या सब्जी में अच्छी तरह समाता है और अगर थोड़ी गंध कच्चे तेल की हो भी तो ख़तम हो जाती है और 5 -7 दिनों के बाद अचार का स्वाद बदल जाता है मतलब और बेहतरीन हो जाता है।
नोट : खट्टे फलो को 5 -7 दिनों से ज्यादा दिनों के लिए सुखाना पड़ सकता है।
9. अचार हमेशा तेल में डूबा क्यों होना चाहिए?
अचार को लंबे समय के लिए सुरक्षित रखने का एक सबसे ज़रूरी नियम है कि अचार का हर टुकड़ा पूरी तरह से तेल में डूबा हुआ होना चाहिए। ये परम्परा वैज्ञानिक परंपरा है।
तेल की परत क्या काम करती है?
- हवा के स्पर्श को रोकना
तेल अचार के ऊपर एक सुरक्षा की परत को बनाता है जिससे हवा अचार के टुकड़ो तक नहीं पहुंच पाती है और नमी को भी नहीं पहुंचने देती है जिस से अचार ख़राब नहीं होता।
- संक्रमण से बचाव
जब तेल पूरी तरह जार में ऊपर तक भरा होता है तो बाहरी वातावरण के बैक्टीरिया को अचार के टुकड़ो तक पहुंचने नहीं देता। जिससे अचार का रंग सुरक्षित रहता है और स्वाद भी ख़राब नहीं होता और लम्बे समय तक ताज़गी बनी रहती है।
अगर अचार ऊपर दिखने लगे तो क्या करें?
कभी-कभी कुछ समय बाद अचार खुद नीचे बैठ जाता है अगर कुछ दिनों बाद भी ना दुबे तेल में तो ये बिलकुल सही नहीं है। आपको और तेल डालना चाहिए गरम करके धुआँ उठने तक, ठंडा करके जिससे अचार के टुकड़े तेल में डूब जाए।
10. अचार रखने की सही जगह
अचार बनाना जितना जरूरी है उसे सही जगह पर रखना उतना ही ज़रूरी है। कई बार आप अचार को रसोई में कहीं भी रख देते हैं जैसे गैस के पास, खिड़की के पास या नमी वाली जगह पर।
लेकिन याद रखें:
गलत जगह पर रखा अचार जल्दी खराब हो सकता है चाहे फिर आपने वह कितना ही भड़िया क्यों ना बनाया हो।
अचार कहाँ रखें?
- ठंडी और सूखी जगह
अचार को हमेशा ऐसी जगह रखें जहाँ पर तापमान सामान्य हो, गर्मी ज्यादा ना हो और नमी तो बिलकुल भी ना हो। ज्यादा गर्मी से तेल की क़्वालिटी काम हो सकती है और स्वाद में कम हो सकता है और नमी से फंगस।
- सीधी धूप से दूर
शुरू शुरू में 5 -7 दिन धुप दिखाना अच्छा होता है लेकिन रोज़ाना अचार को सीधा धूप में नहीं रखना चाहिए और न ही खिड़की के पास रखे क्यूंकि इससे अचार जरूरत से ज्यादा पक सकता है और तेल और अचार की खूशबू बदल सकती है इसलिए गैस या चूल्हे से भी दूर रखे और सिंक से से भी।
अचार बनाते समय 5 सबसे बड़ी गलतियाँ
- गीले फलो और सब्जियों का इस्तेमाल करना।
- अचार में कच्चे तेल को डालना।
- अचार लेते समय गीली या गंदी चम्मच का इस्तेमाल करना।
- अचार बनाते समय नमक कम डालना या ज्यादा डालना।
- अचार बनने के बाद उसे धूप न दिखाना।
ये सब गलतियाँ जो अचार बनाते समय होती है इन्ही गलतियों के बारे में National center for home food preservation भी यही बताता है।
