अचार अपने भारत में लगभग हर घर में बनाया जाता है। आम, नींबू, मिर्च, गाजर, गोभी, लहसुन ये सब अचार आप पुराने समय से पीढ़ी दर पीढ़ी बनाते आ रहे हो। लेकिन कभी कभी किसी किसी अचार में समस्या आ जाती है जैसे अचार में फफूंदी लग जाना या सफेद सफेद परत अचार के ऊपर जम जाना और फिर लगता है महीनो की मेहनत और पैसा दोनों का नुक्सान हो जाता है क्यूँकि अचार जल्दी ख़राब हो जाता है।
फिर आप सोचते हैं कि शायद तेल कम था या नमक काम था या धूप दिखानी चाहिए थी और ऐसे हे तरह तरह की बाते मन में आने लगती है। लेकिन अचार में फफूंदी लगने या सफ़ेद परत आने के कई करण हो सकते है।
पहले तो ये समझे की अचार में फफूंदी क्या होती है ?
फफूंदी ना एक तरह की फंगस होती है जो नमी और हवा मिलने फंगस बनती है होता ये है कि फफूंदी के स्पोर्स पहले से ही हवा में होते है और सही वातावरण मिलते ही वो बढ़ने लगते है जिससे फफूंदी का जन्म होता है जोकि अचार में दिखना आम बात है जैसे कि अचार के ऊपर सफेद परत ,हरे या काले रंग के धब्बे , रुई जैसी दिखने वाली परत तो कभी कभी काले रंग की परत दिखाई देती है। और ऐसा तभी हो पाता है जब नमी मौज़ूद हो ,तेल कम हो , नमक कम हो या बर्तन गीला हो।
सबसे आम गलती:
आचार बनाते समय आप सोचते है कि थोड़ा खराब हिस्सा काट देंगे और यही छोटा सा खराब हिस्सा धीरे-धीरे पूरे अचार को खराब कर देता है। यह गलती लगभग घरों में होती है।
बस ये याद रखें :- “जो चीज़ आप खुद खाने में हिचकिचाए, उसे अचार में कभी न डालें।”
अचार में फफूंदी क्यों लगती है 9 बड़े कारण
अचार में नमी होना अचार में नमी रह जाना जिसके कारण फंगस लग सकती है।
- कम नमक डालने से छोटी-मोटी फंगस जल्दी ही बड़ी फंगस का शिकार अचार को बना लेती है।
- तेल की मात्रा कम होना जिसके कारण तेल से ऊपर निकला हुआ अचारतुरंत फंगस पकड़ लेता है।
- गीली चम्मच का इस्तेमाल करने से अचार में नमी का जुड़ा होता है और फंगस लग सकती है।
- अचार को धूप ना दिखाना क्योंकि धूप दिखाने से हवा में मौजूद नमी अचार को जल्दी खराब करने का निमंत्रण देती है।
- मसालों का सही से सूखे ना होने से अचार जल्दी ही खराब हो सकता है क्योंकि मसाले को पीसते समय पानी का छीटा भी दिया जाता है जिस से आचार में नमी पैदा हो जाती है।
- बार-बार हाथ डालने से अचार खराब हो जाता है क्योंकि हाथों से हम बहुत सारी चीजों को छूते रहते हैं जिससे बुरे बैक्टीरिया अचार तक पहुंच जाते हैं।
- खराब तेल का इस्तेमाल करने से भी अचार खराब हो जाता है क्योंकि लोग पकोड़े या कुछ तलने के बाद बचे हुए तेल का इस्तेमाल अचार के लिए करते हैं जिससे आचार अशुद्ध हो चुका होता है।
- गंदा बर्तन इस्तेमाल करने से भी अचार खराब हो ही जाएगा क्योंकि जहां पर गंदगी होगी वहां पर अचार ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाएगा।
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अचार में फफूंदी की पहचान कैसे करें
देखिए अचार में फफूंदी की पहचान अगर शुरुआत में कर ली जाए तो हम अचार को आसानी से बचा सकते हैं लेकिन आचार पूरी तरीके से फफूंदी के जाल में फंस गया मतलब गंभीर रूप से फफूंदी ने जकड लिया तो अचार को सुरक्षित करना बहुत मुश्किल बात हो जाती है इसलिए हमें फफूंदी के शुरुआती और गंभीर लक्षणों के बारे में पता होना ही चाहिए।
शुरू के लक्षण
शुरू शुरू में फफूंदी हल्की होती है इसलिए बहुत ही ध्यान से देखने पर ही दिखाई पड़ती है।
- सफेद पतली परत :- अगर अचार के ऊपर पतली सफेद पर दिखाई दे रही हो तो ये फफूंदी हो सकती है।
- तेल के ऊपर झाग :- अगर तेल के ऊपर बुलबुले या झाग दिखने लगे तो इसका मतलब समझे कि अब अचार खराब होने वाला है।
- हल्की बदबू :- अगर अचार की खुशबू बदलने लगे और हल्की खट्टी खट्टी सी लगे या आचार जैसी गंध से अलग गंध आने लगे तो हो सकता है कुछ दिनों में अचार खराब हो जाए।
देखिए अगर यहां पर सही कदम उठाया जाए तो अचार को आसानी से खराब होने से बचाया भी जा सकता है।
गंभीर लक्षण
अगर सही समय पर ध्यान ना दिया जाए तो फफूंदी की समस्या अचार को गंभीर रूप से घेर लेती है।
- काले धब्बे :- अचार के ऊपर काले रंग के धब्बों का दिखाई देना।
- हरे धब्बे :- हरे रंग की फफूंदी का अचार में फैलना।
रुई जैसी परत :- अचार के ऊपरी हिस्से में रुई जैसी मोटी परत का आ जाना।
यह सभी लक्षण बताते हैं कि आचार अब गंभीर रूप से खराब हो चुका है और ऐसे अचार को खाना बिल्कुल भी सेहत के लिए अच्छा नहीं है ऐसे अचार को फेंक ही देना चाहिए।
अगर अचार में शुरुआती फफूंदी दिख जाए तो क्या करें?
अगर अचार में शुरुआत में ही सफेद पतली परत, झाग या गंध बदलने लगी है तो परेशान ना हो क्योंकि इसे कुछ तरीके अपना कर ठीक किया जा सकता है।
- ऊपर की परत को तुरंत हटा दें :- जहां भी सफेद परत या झाग दिखे उसे चम्मच से ऊपर ऊपर से तुरंत हटा कर बाहर फेंक दें।
ध्यान रखें कि चम्मच को ज्यादा गहराई तक ना लेकर जाए।
- अचार को धूप में रखें :- अचार को 4-5 घंटे के लिए धूप में रख दें इससे अचार की नमी खत्म हो जाएगी फफूंदी का बढ़ना रुक जाएगा और आचार सुरक्षित हो जाएगा।
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तेल को गर्म करके डालें :- सरसों का तेल हल्का गर्म करके फिर उसे ठंडा करें और अचार में ऊपर से डालें इससे तेल की नई परत बनेगी जिससे फफूंदी पर रोक लगेगी।
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नमक थोडा बढ़ा दे :- नमक को थोड़ा सा ज्यादा डालकर अच्छे से हिला दे। नमक फफूंदी और बैक्टीरिया दोनों को बढ़ाने से रोक देता है।
- जार या डिब्बे को साफ करें :- अगर हो सके तो अचार को अचार के डिब्बे से बाहर निकाल कर सूखे और साफ जार में आचार को दोबारा डालें क्योंकि पुराना जार गंदा हो सकता है और फफूंदी दोबारा आ सकती है।
अगर अचार में फंगस गंभीर रूप से लगी हो जैसे काले धब्बे, हरे धब्बे या बुलबुले ज्यादा दिखने लग जाए तो ऐसे अचार को फेंक देना ही बेहतर होगा क्योंकि वह लगभग लगभग खराब हो चुका है ऐसे अचार को खाने से सेहत खराब हो सकती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या फफूंदी वाला अचार खा सकते हैं?
देखिए अगर अचार के ऊपर हल्की सफेद परत है तो उसे हटाया जा सकता है लेकिनअगर काले धब्बे या हरे धब्बे दिखाई दे रहे हैं तो उसको खाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
क्या धूप से अचार की फफूंदी खत्म हो सकती है?
हां अगर हल्की सफेद परत है तो धूप फफूंदी को खत्म कर देती है लेकिन परत मोटी है या ज्यादा फफूंदी लग गई है तो फिर धूप का असर नहीं होता है।
अचार में कितना नमक डालना चाहिए?
अचार में लगभग 7 से 8 परसेंट तक का नमक सही माना जाता है लेकिन अगर नमक की मात्रा कम डालें तो अचार जल्दी खराब हो सकता है।
अचार में कौन सा तेल सबसे अच्छा माना जाता है?
सरसों का तेलअचार के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है क्योंकि ये तेल फंगस को रोकने में मदद करता है।
अचार को फ्रिज में रखना चाहिए या बाहर?
अचार को 18 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक के तापमान में रखना बेहतर है 42 डिग्री से ज्यादा टेंपरेचर होने पर फ्रिज में रखा जा सकता है ध्यान रहे कि अचार को नमी से दूर रखें और सूखे स्थान पर रखें।
अचार कितने दिन तक खराब नहीं होता?
सही तरीके से बना और रखा गया अचार 1 साल से लेकर 5 साल तक सुरक्षित रह सकता है और ज्यादा भी रह सकता है लेकिन ज्यादा समय के बाद अचार पूरी तरीके से गल चुका होता है।
अचार में बार-बार फफूंदी क्यों लगती है?
इसके काफी सारे कारण हो सकते हैं जैसे गीली चम्मच का इस्तेमाल करना,कम तेल का प्रयोग करना, कम नमक का प्रयोग करना, बार-बार हाथों का प्रयोग करना। ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे।
